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तेरा साथ हो ( Tera Sath Ho ) | Love Poetry in Hindi

कट जायेंगे ये रस्ते सभी , गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो कुछ मिले ना मिले इस जहां में मुझे , मगर मुझकों तो बस तेरा साथ हो जीने को तो यु ही जी लेंगें तन्हा , पर तू साथ हो तो क्या बात हो बहारें - बहारें ही होंगी दिल के चमन में , कुछ भौंरे कलियाँ भी मुस्काती होंगी कुछ फूल पति लगी होगी डाली पे मन की , कुछ चिड़ियाँ घरौंदे बनातीं भी होंगी सुगन्धित , प्रफुल्लित मन होगा मेरा , मुस्काने भी होठों पे आती ही होंगी स्वर्ग सा सुन्दर घर होगा मेरा , खुशियाँ वहाँ मुस्काती भी होंगी हर दिन लगेगा त्यौहार जैसा , जो पायल आँगन में तेरी रूनझुनातीं होंगी मुझको मिल जायेंगे सुख इस जहाँ के सभी , जब संग माँ के बैठ तुम बतियातीं होंगी सच कह रहा हूँ तुम्हारे बिना , न कहीं मेरी ये दुनियाँ मुस्काती होंगी जिस तरहा मिलती हो ख्वाबों में मुझको , जो मिलो तुम हक़ीकत में क्या बात हो मिले ना मिले फिर जहाँ से मुझे कुछ , बस हाथों में मेरे तेरा हाथ हो मैं मानूँगा खुद को बड़ा खुशनसीब , गर नसीबों मेरे तेरा साथ हो कट जायेंगे ये रस्ते सभी ,गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो ...

प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational Poetry in Hindi

प्रयास करो प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो बिना लड़े जीत या हार नहीं होती यूँ ही तूफानों से नौका पार नहीं होती नाविक जब हिम्मत लाता हैं नौका तूफा में पार ले जाता हैं चींटी जब जिद पर आती हैं सौ गुना भार ले जाती हैं हठ चींटी सी पाओ तुम अर्जुन का तीर बन जाओ तुम जब तक ना लक्ष्य पाओ तुम हर विराम तज जाओ तुम यूँ न डरकर घने अंधेरों से तुम हिम्मत का त्याग करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो नभ पर सूरज सा चढ़ जाओ तम से किरणों सा लड़ जाओ अपने को तुम पहचानों अब क्षमताओं को अपनी निखारों अब अब पथ पे न पीछे पाँव हटे हो मुश्किल कितनी भी रहो डटे प्रयास करो अब बार-बार एक दिन लक्ष्य को पाओगें पाकर अम्बर पर छाओगें न यूँ हारों से धैर्य खोकर आशाओं का विनाश करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारों लगातार करो कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational P...

बावली सी लड़की (Bawali Si Ladki ) | Love Poetry in Hindi

वो बावली सी लड़की ख्वाबों में आ रही है जाने मुझे क्यों इतना आजकल सता रही है कुछ बोलती नहीं बस देखती है मुझको मानो वो प्यार मेरा यु ही आजमा रही है लड़ती झगड़ती रहती थी कभी वो मुझसे यारों आजकल तो बातचीत भी न हो पा रही है कभी रूठती थी मुझसे , कभी यु ही मान जाती कभी बात मान लेती , कभी अपनी ही चलाती मुस्कराहटे भी उसकी कहीं खोती जा रही हैं लब पे हंसी है पर , न पहले सी खिलखिला रही है कोई बात है जहन  में जो उसको सता रही हैं वो बावरी सी लड़की ख्वाबों  में आ रही है कभी नजरे मिला रही है कभी नजरे चुरा रही है कहना चाहती है कुछ , कुछ ना कह पा रही है ना चाहते हुए भी कितना सता रही हैं ये बेचैनी बेकरारी बढ़ती ही जा रही है वही बावरी सी लड़की  ख्वाबों  में आ रही है जाने क्या मन में उसके, क्या जाने छुपा रही है मासूम सी छवि वो मुरझाए जा रही हैं न सखियों से कुछ भी कहती , गुमसुम सी बैठी रहती जाने क्या बात है जो सबसे छुपा रही है वही बावरी सी लड़की ख्वाबों में आ रही है कह दे तो जान लू मैं , कुछ दर्द बाँट लू मैं हो कोई भी मुसीबत उसका हाथ थाम लू म...