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लौटकर आ रहा हूँ ( Loutkar Aa Rha Hun ) | Hindi Poetry | motivational poem

आज कल खुद को भटका रहा हूँ जहाँ छूट गया था रास्ता वहीं लौटकर आ रहा हूँ मुश्किल था यूँ लौट कर आना जो उठ गए थे कदम उन्हें पीछे हटाना खुद को यूँ कहीं से ढूंढ कर ला रहा हूँ जहाँ छूट गया था रास्ता वहीं लौटकर आ रहा हूँ शायद सपनो की बाहों में खो गया था कुछ बातों में उलझकर रह गया था आज उलझनों को  तोड़कर आ रहा हूँ जहाँ छूट गया था रास्ता वहीं लौटकर आ रहा हूँ सब छोड़ गए साथी  पर हम ना भागे हठ की थी हमने बढ़ने की आगे आज हठ तोड़कर लौटकर आ रहा हूँ जहाँ छूट गया था रास्ता वहीं लौटकर आ रहा हूँ बढ़े थे पाने को जिसको अब वो मंजिल नहीं है इस कस्ती का अब कोई साहिल नहीं हैं अब सब भूलकर लौटकर आ रहा हूँ जहाँ छूट गया था रास्ता वहीं लौटकर आ रहा हूँ कवि - महेश "हठकर्मी " प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। लौटकर आ रहा हूँ ( Loutkar Aa Rha Hun ) | Hindi Poetry | motivational poem    कविता उत्साहवर्धक कविता है जो भटक...

प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational Poetry in Hindi

प्रयास करो प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो बिना लड़े जीत या हार नहीं होती यूँ ही तूफानों से नौका पार नहीं होती नाविक जब हिम्मत लाता हैं नौका तूफा में पार ले जाता हैं चींटी जब जिद पर आती हैं सौ गुना भार ले जाती हैं हठ चींटी सी पाओ तुम अर्जुन का तीर बन जाओ तुम जब तक ना लक्ष्य पाओ तुम हर विराम तज जाओ तुम यूँ न डरकर घने अंधेरों से तुम हिम्मत का त्याग करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो नभ पर सूरज सा चढ़ जाओ तम से किरणों सा लड़ जाओ अपने को तुम पहचानों अब क्षमताओं को अपनी निखारों अब अब पथ पे न पीछे पाँव हटे हो मुश्किल कितनी भी रहो डटे प्रयास करो अब बार-बार एक दिन लक्ष्य को पाओगें पाकर अम्बर पर छाओगें न यूँ हारों से धैर्य खोकर आशाओं का विनाश करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारों लगातार करो कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational P...

हँसी  ( Hanssi ) | Hindi Motivational poetry

हँसना भी एक हुनर होता है न ये हर कहीं, न हर डगर , न हर रहगुजर होता हैं आँसुओं को आँखों में छुपाना बेहतर होता हैं जो झलक आये आँखों से आँसू उन्हें आँखों से झलक जाने दो कुछ को पलकों पे कुछ को गालों पे सज जाने दो आँसू  ही हैं आखिर , आंसुओं को आँसू बनके बह जाने दो बह निकले जब सारे आँसू फिर से वही मुस्काने होठों पर आने दो हम सीख लिए ऑंसुओ से हँसना अब जरा ज़माने को सिखाने दो कवि - महेश "हठधर्मी" हँसी  ( Hanssi ) | Hindi Motivational poetry  एक लघु कविता है जिसमे हँसी के महत्व को समझाने का प्रयास किया गया हैं। 

कहानी होनी चाहिए ( Kahani Honi Chahiye ) | Hindi motivational poetry

जिये  जो जिंदगी तो फिर कहानी होनी चाहिए जवानी में तुम्हारी एक रवानी होनी चाहिए बहा वतन के वास्ते जो कतरा - कतरा खून का उस खून की भी एक तो निसानी होनी चाहिए निशानियाँ तो रखते हैं गुजरे वक्त की सभी मगर निशानियों की एक बड़ी कहानी होनी चाहिए हम रहे या ना रहे बयान करने वास्ते मगर जुबानी औरों की बयान होनी चाहिए जिये जो जिंदगी तो फिर कहानी होनी चाहिए कमाई ना हो दौलते , चाहें शोहरते हांसिल न हो हाँ मगर तेरे कर्म में भलाई होनी चाहिए भले खुश हो सका ना कर सका पर वजहा से तेरी , किसी आँख में न रुलाई होनी चाहिए जो आये जहाँ में सभी , जायेंगे एक दिन मगर जाने से पहले एक तो , निशानी होनी चाहिए जिए जो जिंदगी तो फिर कहानी होनी चाहिए ........ कवि - महेश "हठकर्मी"  कहानी होनी चाहिए ( Kahani Honi Chahiye ) | Hindi motivational poetry कविता में व्यक्तियों से जीवन काल में कोई विशेष कार्य करने की प्रेरणा दी गई हैं। अगर आप इस कविता से प्रेरित होते है तो हमारे प्रयास सफल हो जायेंगे। 

हल्दीघाटी | Hindi poetry

बरछी से बरछी टकराई , तलवार लड़ी तलवारों  से तब तीर चले तलवार चले , चले भाले पैदल और अश्व सवारों पे चेतक पे राणा हो सवार आ गए रण में रण बाँको से राणा अरिदल पर टूटे ऐसे जैसे सिंह टूट पड़ा मृगछानो पे राणा दल  ने मुगलों के सिरों को काट दिया धरती को शवों से पाट दिया राणा पूछे वो मान कहाँ , जो करता मुगलों का गान यहाँ चेतक भी हवा से बात करे अरिदल पर रण में घात करें मुण्ड कटे गज झुण्ड कटे , धरती शोणित से लाल हुई राणा का साहस देख - देख , मुगल सेना भय से त्रस्त हुई तब ही राणा ने देख लिया मान युद्ध कर रहा हाथी पर जिस स्वाभिमान को गिरवी रख ये मान चढ़ा इस हाथी  पर आज मारकाट इस मान को , उस स्वाभिमान को मुक्त कराऊंगा मुगलों  और मान को मार काट केशरियाँ ध्वजा लहराऊंगा राणा ने मन में ये कर विचार मान पे धावा बोल दिया तब चेतक आगे बड़ा चला अरिदल को पांवों से रोंद दिया चेतक ने लगाई छलांग विकट , पांवों को हाथी मस्तक पर अड़ा दिया तब राणा ने मान को लक्ष्य बना भाले से प्रबल प्रहार किया भाला लक्ष्य से चूक गया टल गया मान प्राणों  से संकट झाला ने ये सब देख लिया , सोंचा...

"महाराणा  प्रताप"

हाथों में आई लेखनी ,हृदय में धधक उठी ज्वाला मानो चेतक पर हो सवार राणा ने हाथ लिया भाला जो युद्ध हो चुका अब निश्चित उसको कैसे जाये टाला अब याद रहे ये बात सदा राणा की जान बचाने को बलिदान हो गया था "झाला " उसने मेवाड़ को मुक्त करवाने का प्रभार राणा पर डाला मेवाड़ी आन बचाने को राणा के हर सैनिक ने हल्दीघाटी में बलिदान स्वयं का कर डाला " जब तक आजाद हो न मेवाड़  मैं लोट न महलों को जाऊँगा धरती को बिछौना बनाऊँगा ,पत्तल-दोनो में खाऊँगा " तब राणा ने भीषण प्रण ये था कर डाला न था धन , न सैन्य पास फिर भी वो करता रहा प्रयास तब ही राणा की सहायता को भामाशाह ने धन दे डाला कहा मातृभोम के लिए जो कुछ कर सकता था वो कर डाला तब राणा ने बल पाया ऐसा असंभव को संभव कर डाला मुगलों को दूर भगा 'मरुभूमि ' को उस भूमिपुत्र ने गौरवान्वित कर डाला उस भूमिपुत्र ने अब भारत को इतिहास नया था दे डाला हाथों में आई लेखनी हृदय में धधक उठी ज्वाला                        ...