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तो क्या हुआ (To Kya Hua ) | Sad Breakup Poetry in Hindi

उसने छोड़ा मुझे तो क्या हुआ  दिल तोडा मेरा तो क्या हुआ देखकर ज़माने की बेरुखी साथ छोड़ा मेरा तो क्या हुआ हसरते थी बहुत साथ जीने की उसके हुई न कोई हसरत पूरी तो क्या हुआ दिखाये थे उसने ख्वाब बहुत सारे देखे थे मेने भी ख्वाब बहुत सारे न हुआ कोई ख्वाब मुक़म्मल तो क्या हुआ छोड़ा उसने मुझको कोई मज़बूरी रही होगी दिल के कोने में कही वो भी तड़पती रही होंगी कह न सकी जाने से पहले कुछ तो क्या हुआ प्यार करती है मुझसे दिल में यही कहती रही होगी प्यार था उसका सच्चा फिरभी छोड़के जाना पड़ा शायद उसे प्यार से बड़ा कोई फर्ज निभाना पड़ा सहकर सब कुछ कुछ न कह सकी तो क्या हुआ प्यार था मुझको उससे , है मुझको उससे बस संग न होंगे हम तो क्या हुआ सांसे तो जुडी है हमारी एक दूजे के संग बस कुछ रिश्ते न जुड़ सके तो क्या हुआ दूर है बहुत पर सदा पास होंगे जुदाई के आलम में भी साथ साथ होंगे यु ही मिलते रहेंगे ख़्वाबो में हरदम मिले न हकीकत में तो क्या हुआ कवि  -  महेश "हठकर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करे...

हाल-ए-दिल ( Haal-E-Dil ) | Sad Poetry in Hindi

अब कभी ना मिट सकेगी मुझको ऐसी प्यास है इस जहाँ  में ना कही  मेरे दर्द का इलाज है बात ये वो बात क्या तेरी हर बात मुझको याद है याद है वो रहना तेरा दर पे निगाहें टिका के याद है वो कहना तेरा तुझसे ही मुझको प्यार है याद है मेरे नहीं आने पे तेरा रूठना अब तेरे जाने से मेरी न दुनिया कही आबाद है अब तो जीने की भी मुझमे ना बची कोई आस है ढूंढ़ता हूँ खुद को खुद में खुद की मुझे तलाश है सुबह शाम हरवक्त दिनभर पल-पल में तेरी याद है ना पा सकूंगा खुद को मैं बेकार ये तलाश है मिट गई आने की तेरी हर आस फिर भी आस है जो न हम पा सके तुझे तो फिर किस काम की ये साँस है मुझको मेरी यादों से ज्यादा याद तेरी याद है ना जी सकूँ जहाँ  में तेरे बिन इसलिए ये अरदास है थाम दे वो साँस मेरी हर साँस पे तेरा नाम है अब कभी ना मिट सकेंगी ऐसी मुझको प्यास है कवि - महेश "हठधर्मी"  प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। हाल-ए-दिल ( H...

असमंजस (Confusion) | Sad Poetry in Hindi

मैं परेशां हो चूका हूँ अब नहीं होता सहन समझ में आता नहीं , क्या हैं सच , झूठ क्या जितने मुहं हैं बातें उतनी , मैं करू किस पर यकीं कोई कहता बात ये हैं , कोई कहता बात ये चेहरे हैं बिलकुल वही , किन्तु नजरिया बदल गया सोंचा कब था क्या मिलेगा , क्या मिला , क्या हो गया मैं तो अपने ही यकीं पर , यकीं निरन्तर करता गया हर किसी की बात को सर आँखों पर रखता गया हर्फ़ -हर्फ़ पर था यकीं , हर हर्फ़ ने दिल को छुआ क्या सुनाऊ दास्ताँ मैं जो कहा करता गया अब तो मुझ पर कर यकीं , कुछ तो कह दे बात क्या सच जानने का भी मुझे न बाकि रहा अधिकार क्या अंधियारों से घिर चूका हूँ , अब तो जला दे तू शमा कोहरे ये छटते नहीं , न ये एकाकीपन कटता यहाँ सुने हुए अब इस चमन में न गुल कोई खिलता यहाँ खुशियाँ कहीं गुमसुम सी हैं , पसरा हैं केवल सन्नाटा सोंचता हूँ कब सहर होगी , कब मिलेगा उजियाला अब कर भी ले मुझ पर यकीं , कुछ तो कह दे बात क्या हैं अभी भी तस्वीर वैसी , किन्तु नजारा बदल गया हैं सूरत अभी भी वैसी की वैसी , सीरत में कुछ तो बदल गया आया तो हैं भूचाल ऐसा जो सारा नजारा बदल गया हालात , हालत सब...

आलम -ए -बेवफाई | Sad Poetry in Hindi

इन गुमनाम राहों से हम भी गुजरे थे कभी मिला जो गम यकीं नहीं आया इन खुशनुमा राहों से हम भी गुजरे थे कभी देखें तो हैं आयने टूटते बहुत टुटा जो दिल , तो टूटने का दर्द समझ आया अभी अपने सारे गम दिल में छुपाये जी रहे है अपने आप को अपने में समाये जी रहें है न बताया ये किसी को , न बतायेंगे कभी मिला हैं जो भी इस जहाँ से , न यूँ सरेआम दिखायेंगे कभी भले वो छोड़ जाये मुझे यूँ ही राहों में भटकने को लेकिन न उसको हम यूँ भटकायेंगे कभी हो सकता हैं भुला दे वो मेरी यादों को सहज ही पर न उसको यूँ आसानी से हम भुला पायेंगे कभी कवि - महेश "हठकर्मी " आलम -ए -बेवफाई (aalam-e-bewafaai ) | Sad Poetry in Hindi  ग़मगीन प्रेमी के गम की अभिव्यक्ति है। जो प्रेमिका द्वारा भुलाया जा चूका है। 

आयने के सामने | love poem in hindi

आयने के सामने जो रोज मैं कहता रहा जो तुम आज आयी सामने क्यों कुछ भी नहीं कह पा रहा कहना तो हैं कुछ और ही कुछ और ही कहे जा रहा निकला जो नजर से तीर हैं होके पार दिल के जा रहा कैसे कहूँ मैं ओ सनम , मैं तुझको कितना चाह रहा तेरी चाहतों में आजकल खुद को भी भूले जा रहा सुध अब मेरी मुझको कहाँ ? , बस तू जहन में आ रही लगता है मुझको आजकल , तू मेरी हर साँस में समा रही है बेताबियाँ दिल में मेरे कब तुझसे दिल की बात हो जो जहन में चल रहे साकार सारे ख्वाब हो कुछ तुम कहो , कुछ मैं कहूँ , बस प्रेम की बरसात हो तेरे खूबसूरत नयनों से नयनों की मेरे बात हो बस यूँ ही देखता तुझको रहूँ , ना आज फिर ये शाम हो आये वो दिन भी जिंदगी में , जब तू बन हमसफ़र मेरे साथ हो कैसे कहूँ हालात-ए-दिल , तू ही समझ ले तो बात हो अब भी कहना तो हैं मुझको बहुत , पर इतना ही कहकर जा रहा ख़्वाबों में भी अब मुझे , बस ख्वाब तेरा आ रहा कवि - महेश "हठकर्मी " आयने के सामने | love poem in hindi  कविता में उस स्थिति का चित्रण किया गया जब प्रेमी अपनी प्रेमिका को propose करना चाहता हैं, परन्तु कह नहीं पाता । उस स्थिति ...

खुश हो न हो | Sad poetry in Hindi

हो भले आँखों में आँसू , मुस्काना पड़ेगा निभा रहे हैं ये रिवाज दुनियाँ में सभी आपको को भी अब इसे निभाना पड़ेगा फूलों कभी सूलों को गले लगाना पड़ेगा खुश हो न हो , खुद को खुश दिखाना पड़ेगा सहकर हर इक गम मुस्काना पड़ेगा अब होठों पर हँसी को भी सजाना पड़ेगा और बना के धुंआ गम को उड़ाना पड़ेगा हो डगर किसी भी चलके जाना पड़ेगा खुश हो न हो , खुद को खुश दिखाना पड़ेगा किया जो प्रेम तो , प्रेम निभाना पड़ेगा अब चाहे मिले खुशियाँ या चाहे मिले गम हर हाल में लेकिन मुस्काना पड़ेगा पाना अगर है प्रेम तो मिट जाना पड़ेगा खुश हो न हो खुद को खुश दिखाना पड़ेगा आएँगी विपत्तियां प्रेमराह में घनघोर जुटा के साहस इनसे भी टकराना पड़ेगा सुध-बुध  को इस जहाँ की भुलाना पड़ेगा खुद को मीरा सा दीवाना बनाना पड़ेगा खुश हो न हो , खुद को खुश दिखाना पड़ेगा कवि - महेश "हठकर्मी"  खुश हो न हो | Sad poetry in Hindi  खुशी, गम, प्रेम और जीवन के उतार चढ़ाव की कविता हैं।  कविता  खुश हो न हो | Sad poetry in Hindi  को पढ़ कर कवि को अनुगृहीत करें। हम आपके सहयोग के लिए आभारी  ...

बेवफा | sad poetry in hindi

एक बेवफा ने मुझको ऐसे भुला दिया टुटा हो कोई घर उसको जला दिया जलते हुए घर से लपटें निकल रही मानो ये आग आज मेरे दिल में लग रही देखा ना बेवफा ने सबकुछ जला दिया यादें सब जला दी , सपना जला दिया दिल का हर इक कोमल भाव जला दिया वो ख्वाबों का मंडप , महल जला दिया सिर बचा है पर सेहरा जला दिया एक बेवफा ने मुझको ऐसे भुला दिया काँटों से सजी सेज उस पर सुला दिया काँटे ये सेज के दिल मेरा भेदते सोचता हूँ आज ये केसा सिला दिया आँखों से आखरी अश्क तक बहा दिया मुस्कराते चेहरे पर गम को सजा दिया एक बेवफा ने मुझको ऐसे भुला दिया हंसना था हमको संग पर उसने रुला दिया कवि - महेश "हठकर्मी " bewafaa (बेवफा  कविता )  एक  sad poetry in hindi  है  इसमे  lover की बेवफाई को दर्शाने का प्रयास किया गया है। इसे पढ़े और यदि आपको पसंद आये तो  कवि का उत्साहवर्धन करें।

मेरी चाहत | sad poetry in Hindi

मिल गया तुम्हे कोई आज हमसे हसी तो क्या हम तो तुम्हे अब भी चाह ही रहे है आये ना आये तुम मिलने को हमसे लेकिन हम तो अभी भी आ ही रहे है भुला दोगे चाहे यादों को सारी लेकिन आँखों में अब भी आ ही रहे है मिले ना मिले तुमको चैनों सुकून कही हम तो अभी भी चैन गवा ही रहे है टूटे दिलो के कतरे जुड़ते नहीं है फिर भी कोशिशें हम किये जा रहे है भूल गया तू वो वादे वो यादे शायद हम तो अभी भी दिल से निभा ही रहे है मिटा ना सके हम खुद को औ यारा लेकिन यादों  को तेरी भी ना मिटा हम रहे है कवि - महेश "हठकर्मी"  meri chaahat (मेरी चाहत ) sad poetry in hindi है इसमे एक प्रेमी ( lover ) के दुख को दर्शाया गया है। ये अद्धुनिक girlfriend boyfriends पर आधारित कविता हैं | 

प्यार की हदे

कहने को यू तो थी बातें कई , पर तुमसे कहना पाए कभी रहना था हमको साथ मगर , रहकर भी रह ना पाए कभी जाने को यू तो गए मौंसम कई, मौंसम-ए-जुदाई क्यों जाता नहीं महफिले भी गई, रुसवाई हुई, क्यों वर्षो की ऐसे जुदाई हुई अरमान दिल के जम से गए, जुदाई के गम से सहम से गए मौंसम गुजरते रुक से गए, लम्हा गुजरते थम से गए तुम भी तो हममें रम से गए, हाँ लम्हा गुजरते थम से गए उन लम्हों को कैसे भुलायेंगे हम, चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम जो लौटे अभी फिर ना आयेंगे हम, तुमको कभी न फिर सतायेंगे हम मिल ना सके इस जहाँ में तो क्या, यादों में नित मिलने आयेंगे हम चाहें टुकड़ो में दिल के बिखर जाये हम, फिर भी चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम दूर हुई है देहे हमारी, पर तुमसे दिल दूर कैसे ले जाये हम चाहा था तुमको जाँ से भी ज्यादा, जां मेरी तुमको ही चाहेंगे हम रूठी है हमसे आज किस्मत हमारी, कैसे ? ऐसे ही तुमको भुलायेंगे हम हमको यकि है चाहत पे अपनी, अब यादों में दुनिया बसायेंगे हम दूर हुए है हम तुमसे मगर, यादों में साथ जिए जायेंगे हम दुनिया की रस्में निभा ना सके , पर प्रेम की...