उसने छोड़ा मुझे तो क्या हुआ दिल तोडा मेरा तो क्या हुआ देखकर ज़माने की बेरुखी साथ छोड़ा मेरा तो क्या हुआ हसरते थी बहुत साथ जीने की उसके हुई न कोई हसरत पूरी तो क्या हुआ दिखाये थे उसने ख्वाब बहुत सारे देखे थे मेने भी ख्वाब बहुत सारे न हुआ कोई ख्वाब मुक़म्मल तो क्या हुआ छोड़ा उसने मुझको कोई मज़बूरी रही होगी दिल के कोने में कही वो भी तड़पती रही होंगी कह न सकी जाने से पहले कुछ तो क्या हुआ प्यार करती है मुझसे दिल में यही कहती रही होगी प्यार था उसका सच्चा फिरभी छोड़के जाना पड़ा शायद उसे प्यार से बड़ा कोई फर्ज निभाना पड़ा सहकर सब कुछ कुछ न कह सकी तो क्या हुआ प्यार था मुझको उससे , है मुझको उससे बस संग न होंगे हम तो क्या हुआ सांसे तो जुडी है हमारी एक दूजे के संग बस कुछ रिश्ते न जुड़ सके तो क्या हुआ दूर है बहुत पर सदा पास होंगे जुदाई के आलम में भी साथ साथ होंगे यु ही मिलते रहेंगे ख़्वाबो में हरदम मिले न हकीकत में तो क्या हुआ कवि - महेश "हठकर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करे...
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