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मेरी चाहत | sad poetry in Hindi

मिल गया तुम्हे कोई आज हमसे हसी तो क्या
हम तो तुम्हे अब भी चाह ही रहे है
आये ना आये तुम मिलने को हमसे लेकिन
हम तो अभी भी आ ही रहे है

भुला दोगे चाहे यादों को सारी लेकिन
आँखों में अब भी आ ही रहे है
मिले ना मिले तुमको चैनों सुकून कही
हम तो अभी भी चैन गवा ही रहे है

टूटे दिलो के कतरे जुड़ते नहीं है
फिर भी कोशिशें हम किये जा रहे है
भूल गया तू वो वादे वो यादे शायद
हम तो अभी भी दिल से निभा ही रहे है
मिटा ना सके हम खुद को औ यारा लेकिन
यादों  को तेरी भी ना मिटा हम रहे है

कवि - महेश "हठकर्मी" 

meri chaahat (मेरी चाहत ) sad poetry in hindi है इसमे एक प्रेमी ( lover ) के दुख को दर्शाया गया है। ये अद्धुनिक girlfriend boyfriends पर आधारित कविता हैं | 

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