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आयने के सामने | love poem in hindi

आयने के सामने जो रोज मैं कहता रहा
जो तुम आज आयी सामने क्यों कुछ भी नहीं कह पा रहा
कहना तो हैं कुछ और ही कुछ और ही कहे जा रहा
निकला जो नजर से तीर हैं होके पार दिल के जा रहा

कैसे कहूँ मैं ओ सनम , मैं तुझको कितना चाह रहा
तेरी चाहतों में आजकल खुद को भी भूले जा रहा
सुध अब मेरी मुझको कहाँ ? , बस तू जहन में आ रही
लगता है मुझको आजकल , तू मेरी हर साँस में समा रही

है बेताबियाँ दिल में मेरे कब तुझसे दिल की बात हो
जो जहन में चल रहे साकार सारे ख्वाब हो
कुछ तुम कहो , कुछ मैं कहूँ , बस प्रेम की बरसात हो
तेरे खूबसूरत नयनों से नयनों की मेरे बात हो

बस यूँ ही देखता तुझको रहूँ , ना आज फिर ये शाम हो
आये वो दिन भी जिंदगी में , जब तू बन हमसफ़र मेरे साथ हो
कैसे कहूँ हालात-ए-दिल , तू ही समझ ले तो बात हो
अब भी कहना तो हैं मुझको बहुत , पर इतना ही कहकर जा रहा
ख़्वाबों में भी अब मुझे , बस ख्वाब तेरा आ रहा

कवि - महेश "हठकर्मी "

आयने के सामने | love poem in hindi  कविता में उस स्थिति का चित्रण किया गया जब प्रेमी अपनी प्रेमिका को propose करना चाहता हैं, परन्तु कह नहीं पाता । उस स्थिति की विसंगतियों को दर्शाने का प्रयास किया गया हैं।
आयने के सामने | love poem in hindi  कविता पाठन के लिए सभी पाठकों का धन्यवाद !

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