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बावली सी लड़की (Bawali Si Ladki ) | Love Poetry in Hindi

वो बावली सी लड़की ख्वाबों में आ रही है
जाने मुझे क्यों इतना आजकल सता रही है
कुछ बोलती नहीं बस देखती है मुझको
मानो वो प्यार मेरा यु ही आजमा रही है

लड़ती झगड़ती रहती थी कभी वो मुझसे यारों
आजकल तो बातचीत भी न हो पा रही है
कभी रूठती थी मुझसे , कभी यु ही मान जाती
कभी बात मान लेती , कभी अपनी ही चलाती

मुस्कराहटे भी उसकी कहीं खोती जा रही हैं
लब पे हंसी है पर , न पहले सी खिलखिला रही है
कोई बात है जहन  में जो उसको सता रही हैं
वो बावरी सी लड़की ख्वाबों  में आ रही है

कभी नजरे मिला रही है कभी नजरे चुरा रही है
कहना चाहती है कुछ , कुछ ना कह पा रही है
ना चाहते हुए भी कितना सता रही हैं
ये बेचैनी बेकरारी बढ़ती ही जा रही है
वही बावरी सी लड़की  ख्वाबों  में आ रही है

जाने क्या मन में उसके, क्या जाने छुपा रही है
मासूम सी छवि वो मुरझाए जा रही हैं
न सखियों से कुछ भी कहती , गुमसुम सी बैठी रहती
जाने क्या बात है जो सबसे छुपा रही है
वही बावरी सी लड़की ख्वाबों में आ रही है

कह दे तो जान लू मैं , कुछ दर्द बाँट लू मैं
हो कोई भी मुसीबत उसका हाथ थाम लू मैं
हो जो भी दर्द उसका , अपना ही मान लू मैं
क्यूँ कुछ बोलती नहीं सब सहती जा रही है
वही बावरी सी लड़की ख्वाबों में आ रही है


कवि - महेश "हठधर्मी" 

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बावली सी लड़की (Bawali Si Ladki ) | Love Poetry in Hindi कविता प्रेमी के उसकी प्रेमिका के प्रति अत्यंत प्रेम की अभिव्यक्ति है। प्रेमी प्रेमिका की चिंताओं से चिंतित हैं और उससे उसकी सारी खलाये जानना चाहता हैं। उसका हर बाधा में साथ निभाना चाहता हैं । बावली सी लड़की (Bawali Si Ladki ) | Love Poetry in Hindi कविता के पाठन  के लिए पाठकों का ह्रदय से आदरपूर्वक धन्यवाद 

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