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मैं तो एक शायर हूँ ( Main to ek shayar hun ) | Hindi poetry

मैं तो एक शायर हूँ मैं तो एक शायर हूँ सबकुछ सह लूँगा अपना दर्द अपने शब्दो से कह लूँगा तू बता ये सबकुछ सहेगी कैसे हुए अगर हम जुदा तो जुदा रहेगी कैसे गम इसका मुझको भी होगा तुझको भी होगा पर ये दर्द-ए-दिल हम सहेंगे कैसे जुदा हो गए तो जुदा रहेगें कैसे दूर हो या पास जुदाई तो होगी जुदा हुए तो रुसवाई भी होगी इस जुदाई के आलम में एक दूजे की धड़कन सुनेगें कैसे जुदा हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे मैं तुम्हे अपना सबकुछ बना ही चूका हूँ आगामी जीवन के सपने सजा ही चूका हूँ जो टूटे ये सिलसिले तो वो सपने टूटेंगे कैसे जुदा  हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे जो सपने टूटना है टूटे, यूँ रब रूठना है रूठे दुआ तो यही हैं तेरा संग कभी न छूटे संग छूटा तो टुकड़े दिल के समेटेंगे कैसे जुदा हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे कवि - महेश "हठकर्मी " प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। एवं पाठक गणों  कविता पसन्द आये तो आपने मित्रों के साथ share करे। ...

जरा सी बात ( Jara si Baat ) | Love Poetry in Hindi

जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों गुस्सा जो तेरी आँख में लगता मुझे तो प्यार हैं फिर प्यारी बातें भला गुस्से में करती हो क्यों जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों गुस्से में तेरे चेहरे पर कुछ लाली और आ गई आँखों में तेरे प्यार की खुमारी और छा गई गुस्सा तो मुझसे हो नहीं फिर इतना बनती हो क्यों जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों तुझको पता है प्यार तो  हैं मुझको भी तुझसे बहुत फिर भला गुस्से में ऐसा करती हो क्यों जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों ये माना की अधिकार हैं, रूठना मुझसे तेरा पर भला यूँ  टुकड़े दिल के करती हो क्यों जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों कवि - महेश "हठकर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। जरा सी बात ( Jara si...

बावली सी लड़की (Bawali Si Ladki ) | Love Poetry in Hindi

वो बावली सी लड़की ख्वाबों में आ रही है जाने मुझे क्यों इतना आजकल सता रही है कुछ बोलती नहीं बस देखती है मुझको मानो वो प्यार मेरा यु ही आजमा रही है लड़ती झगड़ती रहती थी कभी वो मुझसे यारों आजकल तो बातचीत भी न हो पा रही है कभी रूठती थी मुझसे , कभी यु ही मान जाती कभी बात मान लेती , कभी अपनी ही चलाती मुस्कराहटे भी उसकी कहीं खोती जा रही हैं लब पे हंसी है पर , न पहले सी खिलखिला रही है कोई बात है जहन  में जो उसको सता रही हैं वो बावरी सी लड़की ख्वाबों  में आ रही है कभी नजरे मिला रही है कभी नजरे चुरा रही है कहना चाहती है कुछ , कुछ ना कह पा रही है ना चाहते हुए भी कितना सता रही हैं ये बेचैनी बेकरारी बढ़ती ही जा रही है वही बावरी सी लड़की  ख्वाबों  में आ रही है जाने क्या मन में उसके, क्या जाने छुपा रही है मासूम सी छवि वो मुरझाए जा रही हैं न सखियों से कुछ भी कहती , गुमसुम सी बैठी रहती जाने क्या बात है जो सबसे छुपा रही है वही बावरी सी लड़की ख्वाबों में आ रही है कह दे तो जान लू मैं , कुछ दर्द बाँट लू मैं हो कोई भी मुसीबत उसका हाथ थाम लू म...

भोली भाली लड़की ( Bholi Bhali Ladki ) | Love Poetry in Hindi

आज रात फिर सपने में आई वही लड़की देखकर जिसे थी मेरी बायीं आँख फड़की देखा जो मेने उसको वो हर बार की तरह मुझपें  भड़की बोली हूँ मैं परी न अप्सरा , मैं हूँ गाँव की साधारण सी लड़की बता तू मुझको क्यों ऐसे देखता है जैसे देखी ही ना हो लड़की मैं बोला भले तू न है परी , न अप्सरा , पर है बेमिशाल लड़की जो तेरे दिल में प्यार है , मोहब्बत है अपनापन है नहीं रखती दिल में अपने हर एक लड़की देखी तो है मेने लड़कियाँ पर तुझसी नहीं देखी जो मैं कुछ कहूं तब भी मुझपे भड़की और ना कहूं तब भी मुझपे भड़की हो  गई है मुझको तुझसे मोहब्बत ये गांव की प्यारी सी भोली भोली सी लड़कियां सुना जो उसने सबकुछ फिर वो मेरी तरफ पलटी न कुछ कहा , न सुना , मुस्कराई और चल दी   कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये।   भोली भाली लड़की ( Bholi Bhali Ladki ) | Love Poetry in Hindi  कविता में एक भ...

तेरा साथ हो ( Tera Sath Ho ) | Love Poetry in Hindi

कट जायेंगे ये रस्ते सभी , गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो कुछ मिले ना मिले इस जहां में मुझे , मगर मुझकों तो बस तेरा साथ हो जीने को तो यु ही जी लेंगें तन्हा , पर तू साथ हो तो क्या बात हो बहारें - बहारें ही होंगी दिल के चमन में , कुछ भौंरे कलियाँ भी मुस्काती होंगी कुछ फूल पति लगी होगी डाली पे मन की , कुछ चिड़ियाँ घरौंदे बनातीं भी होंगी सुगन्धित , प्रफुल्लित मन होगा मेरा , मुस्काने भी होठों पे आती ही होंगी स्वर्ग सा सुन्दर घर होगा मेरा , खुशियाँ वहाँ मुस्काती भी होंगी हर दिन लगेगा त्यौहार जैसा , जो पायल आँगन में तेरी रूनझुनातीं होंगी मुझको मिल जायेंगे सुख इस जहाँ के सभी , जब संग माँ के बैठ तुम बतियातीं होंगी सच कह रहा हूँ तुम्हारे बिना , न कहीं मेरी ये दुनियाँ मुस्काती होंगी जिस तरहा मिलती हो ख्वाबों में मुझको , जो मिलो तुम हक़ीकत में क्या बात हो मिले ना मिले फिर जहाँ से मुझे कुछ , बस हाथों में मेरे तेरा हाथ हो मैं मानूँगा खुद को बड़ा खुशनसीब , गर नसीबों मेरे तेरा साथ हो कट जायेंगे ये रस्ते सभी ,गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो ...

खत -ए -मोहब्बत ( Khat-E-Mohobbat ) | Love Poetry in Hindi

रातभर की कोशिश बहुत अरमां दिल के लिख डालू मैं भी सनम के नाम अपने खत -ए -मोहब्बत लिख डालू फिर सोचा दो पल रुक जाऊ , फिर सारे अरमां लिख डालू वो नयनो के टकराने का किस्सा किस्सा लिख डालू तू बसा मेरे कहाँ किस हिस्से में वो हिस्सा हिस्सा लिख डालू वो नयनों से हुई सब बातों का कच्चा चिठ्ठा लिख डालू परवाह नहीं दुनियां की मुझको , जो दिल ने कहा सब लिख डालू वो बेचैनियां , बेकरारियाँ , रातों का जगना लिख डालू विरहा में पिये हलाहल का कतरा कतरा लिख डालू तेरे खाव्बों में आने पर , आने पर आकर जाने पर हर शब्द कहानी लिख डालू औरों की नहीं अब अपनी जुबानी सारी कहानी लिख डालू जब -जब मैं तुझसे मिलता तुझमे ही कहीं खो जाता हूँ खोकर मेरे ना मिलने की ये अजब कहानी लिख डालू नजरें मिलना , मिलकर झुकना , झुककर उठना सब लिख डालू वो बिन कहे सब कहने का ,तेरा अंदाज नया सा  लिख डालू मैं भी सनम के नाम अपने , अब खते मोहब्बत लिख डालू कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता...

प्यार | love poem in hindi for girlfriend

इसी तलक मैं तुम्हें प्यार करता जाऊँगा चलो जो राह वहीं राह चलता जाऊँगा तुझें कभी लबों पे कभी आँखों में सजाऊँगा मैं इसी कदर तुम्हे प्यार करता जाऊँगा मैं तेरी पायल में झनझनाऊँगा मैं तेरी बिंदियाँ में जगमगाऊँगा मैं संग तेरे कंगन के खनखनाउंगा मैं इसी कदर तेरी हर साँस में समाऊँगा बनी जो राधा तुम तो मैं भी श्याम बन जाऊँगा मैं तुझे न इक पल भी भूल पाऊँगा तेरी आँखों में अश्क न आये इस वास्ते हर गम में मुस्कराऊँगा मैं इसी तलक तुम्हें प्यार करता जाऊँगा कवि - महेश "हठकर्मी " "प्यार" love poem in hindi for girlfriend  प्रेमी की प्रेमिका के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति है। इस कविता को पढ़े और "प्यार" love poem in hindi for girlfriend  कविता के कवि  को कृतार्थ करे। हम आपके सहयोग और योगदान के लिए आपके आभारी हैं 

प्यार की हदे

कहने को यू तो थी बातें कई , पर तुमसे कहना पाए कभी रहना था हमको साथ मगर , रहकर भी रह ना पाए कभी जाने को यू तो गए मौंसम कई, मौंसम-ए-जुदाई क्यों जाता नहीं महफिले भी गई, रुसवाई हुई, क्यों वर्षो की ऐसे जुदाई हुई अरमान दिल के जम से गए, जुदाई के गम से सहम से गए मौंसम गुजरते रुक से गए, लम्हा गुजरते थम से गए तुम भी तो हममें रम से गए, हाँ लम्हा गुजरते थम से गए उन लम्हों को कैसे भुलायेंगे हम, चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम जो लौटे अभी फिर ना आयेंगे हम, तुमको कभी न फिर सतायेंगे हम मिल ना सके इस जहाँ में तो क्या, यादों में नित मिलने आयेंगे हम चाहें टुकड़ो में दिल के बिखर जाये हम, फिर भी चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम दूर हुई है देहे हमारी, पर तुमसे दिल दूर कैसे ले जाये हम चाहा था तुमको जाँ से भी ज्यादा, जां मेरी तुमको ही चाहेंगे हम रूठी है हमसे आज किस्मत हमारी, कैसे ? ऐसे ही तुमको भुलायेंगे हम हमको यकि है चाहत पे अपनी, अब यादों में दुनिया बसायेंगे हम दूर हुए है हम तुमसे मगर, यादों में साथ जिए जायेंगे हम दुनिया की रस्में निभा ना सके , पर प्रेम की...

अभी तो आये हो अभी क्यों जाना है

अभी तो आये हो अभी क्यों जाना है बैठ यमुना किनारे समय साथ बिताना है क्या घर जाने का ये कोई नया बहाना है जाने का नही प्रियतम आने का बहाना है कहकर हम आये है मंदिर हमे जाना है अभी तो आये हो अभी क्यों जाना है कुछ देर तो ठहरों तुम ,हमे कुछ तुम्हे बताना है कुछ तुम्हे बताना है , कुछ तुम्हे सुनाना  है अम्बर में जब तक है सूरज , चंदा , तारे नित मिलकर हमको ये प्रेम निभाना है अभी तो आये हो अभी क्यों जाना है मुरली की धुनों पर भी नाचना और गाना है कुछ देर तो ठहरो तुम जल्दी क्यों जाना है जाना ही होगा प्रियतम हमे माँ ने बुलाया है जाना ही अगर है ,कल मिलने का वादा कर जाना है     Poet - MAHESH KUMAR MEENA

एक हसीना से ,आज रास्ते में मुलाकात हो  गई

एक हसीना से ,आज रास्ते में मुलाकात हो  गई जो नही होना था, यारों  वही बात   हो  गई अँखियों से लड़ गई अँखियाँ हम खो बैठे थे चेना इतने में यारों बरसात हो गई ,वो इतराई ,वो मुस्कराई लगा आज तो सारी हदे पार हो गई एक हसीना से ,आज रास्ते में मुलाकात हो गई वो प्रेम की जैसे अलग छटा ,छाई मानो जैसे मुझपे घटा इस घटा से प्रेम बरसात हो गई केश थे उसके घुंघराले ,लगते थे घटा से भी काले थी  तन पर सारे योवन डाले नजरें जो उठी उसकी तो कत्लेआम कर गई एक हसीना से, आज रास् में मुलाकात हो गई थे होठ या उसके मधुशाला ,लगते थे सुमधुर मयप्याला रूप था उसका मतवाला ,दिल घायल उसने कर डाला देखा जो तिरछी आँखों से कमाल कर गई आँखों ही आँखों में सारी बात कर गई एक हसीना से ,आज रास्ते में मुलाकात हो गई                                            ...