सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

प्यार की हदे

motivational poems in hindi, motivational poems in hindi about success, short inspirational poems in hindi


कहने को यू तो थी बातें कई , पर तुमसे कहना पाए कभी
रहना था हमको साथ मगर , रहकर भी रह ना पाए कभी
जाने को यू तो गए मौंसम कई, मौंसम-ए-जुदाई क्यों जाता नहीं
महफिले भी गई, रुसवाई हुई, क्यों वर्षो की ऐसे जुदाई हुई

अरमान दिल के जम से गए, जुदाई के गम से सहम से गए
मौंसम गुजरते रुक से गए, लम्हा गुजरते थम से गए
तुम भी तो हममें रम से गए, हाँ लम्हा गुजरते थम से गए
उन लम्हों को कैसे भुलायेंगे हम, चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम

जो लौटे अभी फिर ना आयेंगे हम, तुमको कभी न फिर सतायेंगे हम
मिल ना सके इस जहाँ में तो क्या, यादों में नित मिलने आयेंगे हम
चाहें टुकड़ो में दिल के बिखर जाये हम, फिर भी चाहा था तुमको ही चाहेंगे हम
दूर हुई है देहे हमारी, पर तुमसे दिल दूर कैसे ले जाये हम

चाहा था तुमको जाँ से भी ज्यादा, जां मेरी तुमको ही चाहेंगे हम
रूठी है हमसे आज किस्मत हमारी, कैसे ? ऐसे ही तुमको भुलायेंगे हम
हमको यकि है चाहत पे अपनी, अब यादों में दुनिया बसायेंगे हम
दूर हुए है हम तुमसे मगर, यादों में साथ जिए जायेंगे हम

दुनिया की रस्में निभा ना सके , पर प्रेम की रस्में निभाएंगे हम
तुम जो बनी राधिका यु अगर हो , तो बन कान्हा मथुरा को जायेंगे हम
होंगे ना अब सामने हम तुम्हारे , पर साँसों में अहसास हमारा ही पाओगे तुम
जैसे खुशबू पुष्पों में रहती अंतिम क्षणों तक, वैसे ही खुद में हमको पाओगी तुम

मिल ना सके इस जहाँ में तो क्या, यादों में नित मिलने आएंगे हम
ये जहाँ, वो जहाँ क्या, हर जहाँ में साथ आएंगे-जायेंगे हम

                                                                      कवि - महेश कुमार मीना

                                                      

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तेरा साथ हो ( Tera Sath Ho ) | Love Poetry in Hindi

कट जायेंगे ये रस्ते सभी , गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो कुछ मिले ना मिले इस जहां में मुझे , मगर मुझकों तो बस तेरा साथ हो जीने को तो यु ही जी लेंगें तन्हा , पर तू साथ हो तो क्या बात हो बहारें - बहारें ही होंगी दिल के चमन में , कुछ भौंरे कलियाँ भी मुस्काती होंगी कुछ फूल पति लगी होगी डाली पे मन की , कुछ चिड़ियाँ घरौंदे बनातीं भी होंगी सुगन्धित , प्रफुल्लित मन होगा मेरा , मुस्काने भी होठों पे आती ही होंगी स्वर्ग सा सुन्दर घर होगा मेरा , खुशियाँ वहाँ मुस्काती भी होंगी हर दिन लगेगा त्यौहार जैसा , जो पायल आँगन में तेरी रूनझुनातीं होंगी मुझको मिल जायेंगे सुख इस जहाँ के सभी , जब संग माँ के बैठ तुम बतियातीं होंगी सच कह रहा हूँ तुम्हारे बिना , न कहीं मेरी ये दुनियाँ मुस्काती होंगी जिस तरहा मिलती हो ख्वाबों में मुझको , जो मिलो तुम हक़ीकत में क्या बात हो मिले ना मिले फिर जहाँ से मुझे कुछ , बस हाथों में मेरे तेरा हाथ हो मैं मानूँगा खुद को बड़ा खुशनसीब , गर नसीबों मेरे तेरा साथ हो कट जायेंगे ये रस्ते सभी ,गर हाथों में मेरे तेरा हाथ हो ...

प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational Poetry in Hindi

प्रयास करो प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो बिना लड़े जीत या हार नहीं होती यूँ ही तूफानों से नौका पार नहीं होती नाविक जब हिम्मत लाता हैं नौका तूफा में पार ले जाता हैं चींटी जब जिद पर आती हैं सौ गुना भार ले जाती हैं हठ चींटी सी पाओ तुम अर्जुन का तीर बन जाओ तुम जब तक ना लक्ष्य पाओ तुम हर विराम तज जाओ तुम यूँ न डरकर घने अंधेरों से तुम हिम्मत का त्याग करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारो लगातार करो नभ पर सूरज सा चढ़ जाओ तम से किरणों सा लड़ जाओ अपने को तुम पहचानों अब क्षमताओं को अपनी निखारों अब अब पथ पे न पीछे पाँव हटे हो मुश्किल कितनी भी रहो डटे प्रयास करो अब बार-बार एक दिन लक्ष्य को पाओगें पाकर अम्बर पर छाओगें न यूँ हारों से धैर्य खोकर आशाओं का विनाश करो प्रयास करो , प्रयास करो जब तक हारों लगातार करो कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत  Update मिल जाये। प्रयास करो ( Prayaas Karo ) | Motivational P...

ठहर जा ऐ जिंदगी ( Thahar Ja E Jindgi ) | Sad Poetry in Hindi

ठहर जा ऐ जिंदगी , क्यों उथल - पुथल मचा रही दो पल तो ठहर जा कभी , बैठूँ कहीं सोचूँ जरा क्या हासिल हुआ , क्या खो दिया हैं बिखरी पड़ी यादें कई , रुक तो जरा समेट लूँ है इनमें कुछ पल खास वो , जो मिले मुझे नसीब से इन्हीं पलों को आँखों में फिर से जरा समेट लूँ चलना तो हैं हमको निरंतर , रुकना नहीं  थकना कहाँ अब जो भी मिले भाग्य में , सहना यहीं जाना कहाँ घड़ियाँ बची जो आखरी , हाथों से फिसले जा रही ठहर जा ऐ जिंदगी , क्यों उथल - पुथल मचा रहीं विश्वास था जिनके साथ का , वो ओझल कहीं पे हो गए कौन लगाता पार नौका , जब स्वयं नाविक नौका डुबो गए पसरा हुआ सन्नाटा अब , गम की कड़कती धुप हैं हैं पाँव में छाले कई , मंजिल अभी भी दूर हैं गुजरा हुआ ये वक्त ना लौटकर फिर आयेगा बस जरा सी यादों में सिमटकर रह जायेगा फिर जानबूझकर , तू क्यों इतना मुझे सता रही ठहर जा ऐ जिंदगी , क्यों उथल - पुथल मचा रहीं कवि - महेश "हठधर्मी" प्रिय पाठकों , यदि कविता आपको पसंद आये और आप आगे भी ऐसी कविताएँ पड़ना चाहते हैं तो कृपया हमारे Website को Subscribe करें ताकि कोई भी नयी कविता आने पर आपको तुरंत ...