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मैं तो एक शायर हूँ ( Main to ek shayar hun ) | Hindi poetry

मैं तो एक शायर हूँ



मैं तो एक शायर हूँ सबकुछ सह लूँगा
अपना दर्द अपने शब्दो से कह लूँगा
तू बता ये सबकुछ सहेगी कैसे
हुए अगर हम जुदा तो जुदा रहेगी कैसे

गम इसका मुझको भी होगा तुझको भी होगा
पर ये दर्द-ए-दिल हम सहेंगे कैसे
जुदा हो गए तो जुदा रहेगें कैसे

दूर हो या पास जुदाई तो होगी
जुदा हुए तो रुसवाई भी होगी
इस जुदाई के आलम में एक दूजे की धड़कन सुनेगें कैसे
जुदा हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे

मैं तुम्हे अपना सबकुछ बना ही चूका हूँ
आगामी जीवन के सपने सजा ही चूका हूँ
जो टूटे ये सिलसिले तो वो सपने टूटेंगे कैसे
जुदा  हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे

जो सपने टूटना है टूटे, यूँ रब रूठना है रूठे
दुआ तो यही हैं तेरा संग कभी न छूटे
संग छूटा तो टुकड़े दिल के समेटेंगे कैसे
जुदा हो गए तो जुदा रहेंगे कैसे


कवि - महेश "हठकर्मी "


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