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दर्द - ए - जहाँ (dard-e-janha ) | Sad poetry in Hindi

दर्द पराया हम क्या जाने
जिस तन बीती वो तन जाने
घाव हरे या गहरे कितने
जिस तन लगे वो तन पहचाने

तन के घाव तो हैं मिट जाने
मन के घाव मिटे तो जाने
देंगे साथ कह गये सभी पर
जो दे कोई साथ तो हम भी जानें

सुख में था संसार साथ पर
अब संकट में ना कोई जाने
जैसे मिटता पतंगा ज्वाला पर
आखिर एक दिन हम भी मिट जाने

न हैं कलह किसी से , न हैं बेर यहाँ
हम प्रेम के पंछी बन उड़ जानें
नहीं रहेंगे हम सदा यहाँ
बस कुछ अवशेष शेष रह जाने

कवि - महेश "हठधर्मी"


दर्द - ए - जहाँ (dard-e-janha ) | Sad poetry in Hindi कविता सांसरिक दुखों की अभी व्यक्ति हैं।  यह कविता काफी तक एक motivatinal poem भी  हैं।  

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