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जरा सी बात ( Jara si Baat ) | Love Poetry in Hindi

जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों
बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों
गुस्सा जो तेरी आँख में लगता मुझे तो प्यार हैं
फिर प्यारी बातें भला गुस्से में करती हो क्यों
जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों
बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों

गुस्से में तेरे चेहरे पर कुछ लाली और आ गई
आँखों में तेरे प्यार की खुमारी और छा गई
गुस्सा तो मुझसे हो नहीं फिर इतना बनती हो क्यों
जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों
बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों

तुझको पता है प्यार तो  हैं मुझको भी तुझसे बहुत
फिर भला गुस्से में ऐसा करती हो क्यों
जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों
बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों

ये माना की अधिकार हैं, रूठना मुझसे तेरा
पर भला यूँ  टुकड़े दिल के करती हो क्यों
जरा - जरा सी बात पर उखड़ती हो क्यों
बात हैं इतनी सी इतना करती हो क्यों

कवि - महेश "हठकर्मी"

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जरा सी बात ( Jara si Baat ) | Love Poetry in Hindi कविता में  प्रेमी के द्वारा प्रेमिका को मनाने के लिए किये जाने वाले प्रयासों का चित्रण है।  प्रेमिका के छोटी छोटी बातों पर रुष्ठ  होने की आदत को बताया गया है पर ये  प्रेम भरी नोंकझोंक का चित्रण  बड़ा मनमोहक है।
      जरा सी बात ( Jara si Baat ) | Love Poetry in Hindi कविता के पाठन  के लिए धन्यवाद

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